Tuesday, November 10, 2009

बाद में


वे चुप थे 
जब हो रही थी हत्या 
उनके सामने 
हाँ ,उन्हें आ रही थी अब शर्म 
कि हत्या हो रही थी और वे चुप थे 
 किया नहीं प्रतिरोध 
जरा  सा भी नहीं ,
उन्हें सचमुच शर्म आ रहीं थी 
पर क्या फर्क पड़ता 
अगर उन्हें शर्म नहीं भी आ रही हो अब 
हत्या हो चुकी थी 

Saturday, November 7, 2009

फूल

सवेरे उठा तो फूल खिला था 
मैं उससे हौले से बतियाया 
उसकी  बातों से और 
भीनी भीनी गंध से भी 
झलकता था साफ-साफ 
कि वह बहुत खुश हैं 
हालाँकि गमले में पानी डालना 
दो दिन से भूल गया था मैं 
और एक कांटा ठीक सिर के नीचे
उसके  भाले सा तना था    
हाँ ,वह फूल 
इतना खुश और निश्चिंत 
लग रहा था 
भला कोई कैसे सोच सकता था 
शाम होते होते वह मुरझा जायेगा 
और कल तक अपनी झाडी से 
जायेगा झड़


महक  उसकी तो बसी रहेगी 
सदा मन में

Tuesday, November 3, 2009

मिट्टी


अजब रिश्ता 
कितना झाडा पोंछा 
पर साँस में भी 

Sunday, November 1, 2009

बचपन


चुपके से कोई आएगा पीछे से 
आँखे बंद कर देगा अपनी हथेलियों से 
और बूझने को कहेगा 
बताओ कौन 
आप जब तक करेंगे कोशिश 
याद करने की
खुरदरे हाथों के 
कोमल स्पर्श को 
अनुभूत करने की
वह  झट से खड़ा हो जायेगा सामने 
चहक कर पूछेगा 
नहीं पहचाना ना 
याद आया?
आप  झेंप कर मुस्करा भर देंगे 


गले में झूलती बिटिया 
बताएगी उंगली रख 
एल्बम के उस फोटो पर 
ये आप ही हैं ना पापा !

Thursday, October 29, 2009

प्रेम


अभी चुका नहीं हैं 
बेहद प्रचलित यह शब्द 
प्रेम 
अर्थ की गरिमा और पवित्रता के साथ 
खड़ा हैं तन कर 
मैं चाहता हूँ टाँक दूं उसे 
तुम्हारे जूडे में फूल की तरह 
उसकी   पंखडियों में 
खिल रही हैं इच्छाएं 
आ रही हैं लगाव की महक 
यकीनन चिड़िया चहकना 
और हवा बहना नहीं छोड़ेगी
बिना जाने भी 
प्रेम की परिभाषा 

Thursday, October 8, 2009

प्रार्थना

देना   
इतनी शक्ति भर 
कि अन्याय को न सहन कर सके 
लाख शत्रु बढ़ जाये 
हो    
इतनी शक्ति भर 
कि शामिल न हो उनके कृत्यों में 
शक्ति अन्याय की लाख बढ़ जाये  

Tuesday, October 6, 2009

मृत्यु

एक दिन नश्वरता का होगा 
भीगी पलकों 
रुंधे कंठ और 
हृदय में हाहाकार का होगा 
शेष सबका होगा 
बस तुम्हारा न होगा 
वह एक दिन 

indic हिंदी rajbhasha parashar