बृहस्पतिवार, 29 दिसम्बर 2011

कुछ जुड़ा
कुछ घटा भी 

कुछ मिटा 
बना सँवरा भी 

था वही 
पर नहीं 
फिर भी 
...

शुक्रवार, 16 दिसम्बर 2011


जनता चुप दिख रही थी
पर चुप नहीं थी  सता की बेचैनी बता रही थी
गूँज रहा था बहरेपन में भी  वो सब सुन रही थी
और चुनना पड़ा वह रास्ता अविकल्प
जनता जिस पर चल चुकी थी

बृहस्पतिवार, 3 नवम्बर 2011

मंत्र अधूरा

अच्छे दिनों की वापसी के लिए 
वे कर रहे प्राथर्नाएं 

विश्वास था उन्हें 
अच्छे दिन लौटेंगे  ज़रूर 
सुनी गयी अगर उनकी प्रार्थनाएं 

वे कर रहे थे प्रार्थनाएं 
उधर रौंदी जा रही थी पृथ्वी
लड़े जा रहे थे युद्ध 
हिनहिना रहे थे घोड़े 
बुरा समय था यूँ कायम 
अपने विस्तार के दंभ के साथ 
वे कर  रहे थे सिर्फ प्रार्थनाएं 
अपनी सदइच्छाओं के साथ  

शनिवार, 10 सितम्बर 2011


ज़िन्दगी सिर्फ एक 
और वह एक भी 
कितनी  आधी अधूरी


 कितने सारे पछतावे 
और कितनी बार मौत 

शनिवार, 20 अगस्त 2011

आज़ादी





वह बुदबुदाया 
आज़ादी...आज़ादी...

और  गिनने लगा 
बेड़िया अपनी

मैंने उसकी तरफ देखा
उसके होंठ थिर  हो गये 

मंगलवार, 19 अप्रैल 2011

राजा को भाए...

राजा को भाते  बस   
मुस्काते हँसते चेहरे 
चेहरों पर आये मुस्कान 
करना पड़ेगा राजा को 
बहुत कुछ 
नहीं कुछ 
सरोकार पर राजा को 

उसे तो बस भाते हैं 
मुस्काते हँसते चेहरे  

शनिवार, 28 अगस्त 2010

अंतःकरण

वह साहस
बहुत मुश्किल से आता हैं
आपके भीतर से कोई चीखता हैं
रुकना नहीं
जो होगा देखा जायेगा
आप ठिठक देखते हैं
कोई नहीं हैं
आसपास
साथ आपके
अकेले हैं
फिर भी रुकते नहीं
कोई हैं
संग बरसो से
जो पला बढा हैं
जो जानता हैं आपको
एक एक अंश
अणु अणु आपका
  धड़कन आपके दिल की
वह हैं जो आपका अपना हैं
हिस्सा हैं आपका
आपके भीतर जो बैठा हैं
यूँ कह लो आप खुद हो
हाँ ,वही देता हैं
वह साहस